न जांच, न प्रमाण, फिर भी मास्क पर 100 गुना मुनाफा

 


न जांच, न प्रमाण, फिर भी मास्क पर 100 गुना मुनाफा


नई दिल्ली। कोरोना वायरस को लेकर 45 दिन से सरकार भले ही लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दे रही हो, लेकिन दिल्ली में जब पॉजीटिव मरीज मिलने की खबर आई तो डर का कारोबार भी उछाल मार गया। अमर उजाला को जब इसकी भनक लगी तो हमारे वरिष्ठ संवाददाता परीक्षित निर्भय ने पड़ताल की। इसमें जो हकीकत सामने आई, उसे आप तक पहुंचाना बेहद जरूरी है ताकि खौफ के इस नए गोरखधंधे से बचाव हो सके।


 

पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर की दुकानों पर सर्जिकल मास्क की कीमत 100 रुपये है। बीते दो दिन में यहां 35 में से 32 दुकानों पर स्टॉक खत्म हो चुका है। जनवरी से पहले तक ये मास्क थोक बाजार से 1.16 रुपये में दुकानदार को मिलता था जिसकी खुदरा कीमत थी ढाई रुपये। अभी ये मास्क 100 रुपये में ग्राहकों को बेचा जा रहा है। जब दुकानदार से इसकी प्रमाणिकता पर सवाल किए तो ग्राहकों के आगे कोई जवाब ही नहीं दिया।
भागीरथ पैलेस, लाजपत नगर, महरौली, साकेत और रोहिणी में थोक दवा दुकानों पर बुधवार को न मास्क मिला और न ही सेनिटाइजर। पूरे उत्तर भारत को दवाएं आपूर्ति करने वाली इन दुकानों पर अब मास्क और सेनिटाइजर नहीं हैं। कुछ के पास स्टॉक है तो वह कई महीनों पुराना है और दूसरे उसकी कीमत 30 से 50 गुना ज्यादा है। दवा विक्रेता संघ के कैलाश गुप्ता बताते हैं कि मास्क की किल्लत फरवरी से चल रही है, लेकिन पिछले चार दिन में दुकानों से लाखों के ऑर्डर आए हैं जिसके चलते थोक बाजार अब पूरी तरह खाली हो चुका है।
थोक बाजार में ही विक्रेताओं से बातचीत में पता चला कि जिन दुकानों पर मास्क उपलब्ध हैं वे नरेला, बवाना और बदरपुर से सप्लाई हो रहा है। यहां कुछ व्यापारियों ने ये कारोबार शुरू किया है जिसकी कोई लैब टेस्टिंग नहीं है। न ही इसका कोई प्रमाण कि कोरोना वायरस से बचाव कर पाएगा लेकिन फिर भी ये कारोबार खूब फल रहा है।
दिल्ली में खुलेआम चल रहे खौफ के इस कारोबार की सरकार व जिम्मेदार लोगों को पूरी जानकारी है। दिल्ली और केंद्र सरकार के तमाम सरकारी विभागों तक ये सूचना पहुंच चुकी है लेकिन लिखित शिकायत न मिलने के कारण ये शांत हैं। दिल्ली के औषधि नियंत्रण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि कोरोना वायरस के चलते ऐसा हो रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए न तो उनके पास कोई आदेश है और न ही कोई लिखित शिकायत।